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महिला अधिकारों संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

महिला अधिकारों संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

पन्ना | 15-अक्तूबर-2020

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के समन्वय से म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष श्री पी.एन. सिंह के कुशल मार्गदर्शन में 14 अक्टूबर को जिला मुख्यालय से दूरस्थ ग्राम महेबा स्थित पंचायत भवन में महिलाओं से संबंधित विधियों उनके अधिकारों की जानकारी प्रदान करते हुए सशक्तीकरण के उद्देश्य से शासन द्वारा निर्धारित कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए श्री आमोद आर्य सचिव जि.वि.से.प्रा. के मुख्य आतिथ्य में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम शुभारंभ के पूर्व पंचायत भवन परिसर में हेल्थ डेस्क स्थापित किया जाकर उपस्थित महिलाओं को मास्क वितरित करते हुए उनका शारीरिक तापमान परीक्षण किया गया तदुपरांत महिलाओं का रजिस्टेªशन करते हुए स्थापित ’हेल्प डेस्क’ के माध्यम से उनकी विधिक समस्याओं के बारे में जानकारी एकत्रित करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ने की ओर दिशा दी गई।
मुख्य अतिथि एवं रिसोर्स पर्सन के आगमन पश्चात् सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा वीणावादिनी मॉ सरस्वती व राष्ट्रपिता महात्मा गॉधी के छायाचित्रों पर माल्यार्पण तथा द्वीप प्रज्जवलित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से श्री आमोद आर्य सचिव जि0वि0से0प्रा0 ने उपस्थित नारी शक्ति का सम्मान करते हुए कहा कि किसी भी देश के विकास की उड़ान एक पंख से नही हो सकती उसके लिए दो पंख रूपी स्त्री-पुरूष का समन्वय आवश्यक है। आपने भारतीय दर्शन एवं समाज में पति-पत्नी के रिश्तों में जीवन-साथी का दर्जा प्राप्त होने को रेखांकित किया।
श्री आर्य ने कहा कि जो स्त्री का अपमान करता है, वह यह निश्चय ही समझे कि वह मॉ का अपमान कर रहे है और यह तो अकाट्य सत्य है कि इस धरा में मॉ ईश्वर तुल्य है। उन्होंने महिलाओं के भावनात्मक पक्ष को रखते हुए कहा कि एक स्त्री अपने जीवन में सिर्फ और सिर्फ सम्मान को प्राथमिकता देती है इसलिए हमें स्त्रियों के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए महिला अपराधों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को विधि द्वारा प्राप्त अधिकारों का उपयोग सकारात्मक रूप से करने एवं जीवन में अपने कर्त्तव्य पालन को प्रथम वरीयता देने हेतु समझाइस दी। श्री आर्य ने स्त्रियों के सशक्तीकरण में शिक्षा के योगदान को अहम बताते हुए बेटियों के शिक्षाकरण पर विशेष बल दिया साथ ही उससे परिवार व समाज में होने वाले सकारात्मक पहलुओं को भी रखा, साथ ही महिला अधिकारो संबंधी विभिन्न विधियों के बारे में जानकारी प्रदान की।
अधिवक्ता एवं रिसोर्स पर्सन श्रीमती आशा खरे ने समानता का पक्ष रखते हुए कहा कि समाज महिला एवं पुरूष दोनो के संतुलन से चलता है, समाज में कई ऐसे लोग भी है जो चिकित्सीय तकनीकों का दुरूपयोग करते हुए उस संतुलन को बिगाड़ने का कार्य करते है। उन्होंने समाज की चुप्पी को ही महिला अपराधों के बढ़ने का प्रमुख कारक बताया। श्रीमती खरे ने बच्चों को ’सुरक्षा घेरा’ का इस्तेमाल करते हुए पॉक्सों अधिनियम से संबंधित विधि पर प्रकाश डाला साथ ही आपने भारतीय दण्ड सहिता के महिला अपराधों से संबंधित प्रावधानों, कन्या भ्रूण हत्या, लिंग परीक्षण संबंधी विधियों पर जानकारी प्रदान की। अधिवक्ता एवं रिसोर्स पर्सन श्रीमती साक्षी दुबे ने भारतीय संविधान में समानता का अधिकार, महिलाओं का परिवार व समाज में निर्णय लेने के अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार, घरेलू हिंसा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह, वन स्टॉप सेन्टर एवं संबंधित अन्य विधियों पर प्रकाश डालते हुए संस्कार और शिक्षा का प्रथम स्त्रोत मॉ अर्थात् स्त्री को बताया। कार्यक्रम के अंत में ग्राम पंचायत संरपंच की ओर से अतिथिगणों का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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