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स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और प्रतिदिन व्यायाम से हड्डियों की सेहत में करें सुधार, ऑस्टियोपोरोसिस से करें अपने हड्डियों का बचाव और रखें दुरूस्त: डॉ राजीव तिवारी अस्थिरोग विशेषज्ञ

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और प्रतिदिन व्यायाम से हड्डियों की सेहत में करें सुधार, ऑस्टियोपोरोसिस से करें अपने हड्डियों का बचाव और रखें दुरूस्त: डॉ राजीव तिवारी अस्थिरोग विशेषज्ञ

World Osteoporosis Day 2020: 20 अक्तूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। इस लॉकडाउन में ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त लोगों की परेशानियां ज्यादा बढ़ीं। बाहर न निकलने से धूप नहीं मिल पाती, जो विटामिन डी का अहम स्रोत है। दूसरी ओर घर में रहने से सक्रियता कम होती है, जिससे हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं। खासतौर पर उम्रदराज लोगों के लिए यह स्थिति बुरी होती है।

बलरामपुर जिला अस्पताल में पदस्थ ऑर्थोपेडिक्स डॉ.राजीव तिवारी से जानते हैं कैसे रखें हड्डियों की सेहत को दुरुस्त-

ऑस्टियोपोरोसिस लैटिन भाषा से निकला शब्द है, जिसका अर्थ है-पोरस बोन्स यानी भुरभुरी हड्डियां। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का लचीलापन कम होता है, उनके बीच का गैप बढ़ने लगता है। मेनोपॉज के बाद भी हड्डियों की सेहत कमजोर होने लगती है। इसके अलावा आनुवंशिक कारणों से भी हड्डियों की सेहत प्रभावित होती है। 30-35 की उम्र के बाद क्षतिग्रस्त हड्डियों की भरपायी मुश्किल होती है। निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा या अत्यधिक दुबलापन, गलत खानपान भी हड्डियों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

उम्र के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का बढ़ता है ख़तरा, ऐसे करें बचाव- डॉ.राजीव तिवारी
उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिससे बचाव के लिए संतुलित भोजन करना चाहिए और डेयरी प्रोडक्ट को भी अपने भोजन में शामिल करें, प्रतिदिन व्यायाम करें और अच्छी नींद लें, धूप विटामिन डी सबसे अहम स्त्रोत है जो इसकी कमी को पुरा करता है, हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए काफी बहुत कम पिए एवं धूम्रपान तथा एल्कोहल के सेवन से बचें।

किसे है ज्यादा खतरा-

ऑर्थोपेडिक्स डॉ. राजीव तिवारी कहते हैं, ‘निष्क्रिय जीवनशैली वाले उम्रदराज लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा सर्वाधिक है। मोटापा तो हड्डियों का दुश्मन है ही, इसके अलावा सबसे ज्यादा खतरा है दुबले लोगों को। अगर उनका वजन लंबाई के मुकाबले कम हो और मसल मास बहुत कम हो तो उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

परिवार में पहले से माता-पिता या किसी अन्य को यह समस्या हो तो बहुत संभावना है कि अगली पीढ़ियों में भी यह स्थानांतरित हो जाए। परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर यानी कूल्हे, पीठ, बांह के ऊपरी हिस्से और कलाई का फ्रैक्चर रहा हो, लंबे समय तक स्टेरॉयड का सेवन किया हो, रूमेटाइड अर्थराइटिस और इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस जैसी समस्या हो, पोषक तत्वों के न पचने जैसी समस्याएं हों जैसे-सीलिएक रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस, लंबे समय तक एंटीपाइलेप्टिक।

सौरव कुमार चौबे की रिपोर्ट

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