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नरवाई जलाने के रोकथाम हेतु संभाग में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी बेहतर प्रयास

होशंगाबाद – 22,अक्‍टूबर,2020/ नरवाई जलाने के रोकथाम हेतु संभाग में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी बेहतर प्रयास एवं प्रबंधन किए जाएं। साथ ही किसान भाइयों को जागरूक करने हेतु विशेष अभियान चलाएं। यह बात कमिश्नर नर्मदापुरम रजनीश श्रीवास्तव ने कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में नरवाई जलाने से रोकने हेतु आयोजित कार्यशाला में कहीं। इस अवसर पर कलेक्टर धनंजय सिंह, कलेक्टर बैतूल राकेश सिंह, कलेक्टर हरदा संजय गुप्ता, उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह , एस ई एमपीईबी बीएस परिहार एवं मुख्य अभियंता राकेश अग्रवाल सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कमिश्नर श्री श्रीवास्तव ने जिले में नरवाई जलाने से रोकने हेतु प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की । उन्होंने तीनों जिले में नरवाई में आग लगाने की घटनाओं को नियंत्रित करने एवं जागरूकता हेतु आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसान भाईयो से आग्रह किया वे नरवाई जलाए नहीं ,उसका प्रबंधन करें । कार्यशाला में उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन में कृषि उपकरणों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी ।उन्होंने कंबाइन हार्वेस्टर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम(एस एम एस) मशीन के बारे में बताया कि यह मशीन भूसे को बारीक काटकर हार्वेस्टर के पीछे खेतों में फैला देती  है। एस एम एस द्वारा कटाई की गई खेतों में हैप्पी सीडर द्वारा सीधे बोनी की जा सकती है, यह मशीन भूसे के बिखराव के कारण मृदा की नमी संरक्षण में भी उपयोगी है। उन्होंने बताया कि स्ट्रारीपर भूसा कटाई यंत्र से कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा गेहूं की कटाई उपरांत खेतों में ही भूसा बनाकर ट्रॉली में संग्रहित किया जा सकता है। हैप्पी सीडर यंत्र द्वारा कंबाइन हार्वेस्टर से अधिक ऊंचाई पर फसल की कटाई उपरांत तत्काल बिना जुताई  अगली फसल की बुवाई की जा सकती है । यह  यंत्र खरीफ धान के अवशिष्टों की मल्चिंग कर मृदा सुधार करने में भी सहायक है। इनके अलावा जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल उपकरण खरीफ फसल कटाई के तत्काल पश्चात बिना जुताई के रबी फसलों की बोनी में उपयोगी है। उपकरण में उर्वरक तथा बीज हेतु अलग -अलग व्यवस्था की गई है। उन्होंने बेलर यंत्र के बारे में बताया कि यह यंत्र ट्रैक्टर चलित उपकरण है जो की फसल अवशेषों का व्यवस्थापन कर बंडलों में तैयार करता है।अवशेष बंडल का उपयोग पशु आहार, इंधन ,पैकिंग कार्य तथा अन्य औद्योगिक उपयोग में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि किसान भाई कृषि यंत्रों के माध्यम से अपनी फसलों के अवशेषों का बेहतर तरह से प्रबंधन कर सकते है।
प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट

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