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कथनी और करनी में अंतर हैं मजदूर संघ ने लगाया आरोप,

कथनी और करनी में अंतर हैं मजदूर संघ ने लगाया आरोप,

होशंगाबाद – मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष महेश वर्मा ने बताया हैं कि अभी हाल ही में नगरपालिका सीएमओ ने निर्णय लिया था कि जिस किसी राजस्व कर्मचारी की राजस्व वसूली कम होगी उसके प्रति निलंबन की कार्यवाही कर दंडित किया जायेगा मजदूर संघ ने इस लिए गये निर्णय का स्वागत भी किया था और निलंबन की कार्यवाही किये जाने के लिए कार्यालय प्रमुख को आदेशित भी किया गया है परंतु ऐसा लगता हैं कि नगरपालिका सीएमओ का सारा जोश राजनैतिक गतिविधि के कारण या संरक्षण प्राप्त कर्मचारियों के कारण ठंडा हो गया क्योंकि जो राजस्व कर्मचारी निलंबन की सूची में हैं वह शहर के अंदर राजनैतिक रसूख रखते है इसलिए इस नगरपालिका में कितने ही सीएमओ आये गये लेकिन रसूखदार राजस्व कर्मचारियों के प्रति कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं कर पाये, नगरपालिका कार्यालय में कुछ महिला पुरूष राजस्व कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने 15 से 25 वर्ष जिनकी सेवा हो गई हैं उनकी राजस्व वसूली निरंतर शून्य है दावा है इस बात का कि इन कर्मचारियों को राजस्व गड्डी का आकार व छपाई भी मालूम नहीं क्योंकि आज तक कभी राजस्व वसूली की गड्डी हाथ में पकडी ही नही हैं लेकिन यही कर्मचारी मासिक वेतन प्राप्त करने में सबसे आगे हैं अगर उनकी सेवाकाल से आज तक राजस्व वसूली और लिए गये वेतनो का आकलन किया जाये तो नगरपालिका ने जो इन महिला पुरूष राजस्व कर्मचारियों को अब तक वेतन दिया हैं अपनी की गई गल्ती जो इनको नौकरी पर रखकर की हैं उनको अपनी की गई गल्ती का एहसास हो जायेगा, राजस्व विभाग में पदस्थ महिला कर्मचारी अगर राजस्व वसूली नहीं कर सकती तो इनको अनुकंपा देते समय नगरपालिका को सोचना व चिंतन करना चाहिए था कि जिस पद पर राजस्व विभाग में पदस्थापना दी जा रही हैं क्या ये महिलायें इस काम के लिए योग्य है या नहीं यह तो नगरपालिका में रोना बनाकर रखा हैं वर्ना भारत देश में देश की बेटियाँ जो महिला हैं देश की सीमा पर, प्लेन, रेल मैं और अन्य स्थानों पर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश के प्रति सेवा समर्पित कर रही हैं जबकि नगरपालिका सीएमओ भी महिला है और अन्य विभागो में महिला कर्मचारी/अधिकारी पदस्थ है वो सब अपने दायित्व कर्तव्य का निर्वाहन कर रही हैं लेकिन नगरपालिका में पदस्थ राजस्व शाखा की महिला कर्मचारी ही अबला की श्रेणी में हैं और जो पुरूष राजस्व कर्मचारी हैं उनको गांजा, शराब सेवन, सट्टेबाज़ी के कामो का प्रतिमाह मासिक वेतनो का भुगतान कर उनको पोषित कर रही हैं नगरपालिका, जो राजस्व कर्मचारी ईमानदारी पूर्वक अपने कर्तव्यनिष्ठा का पालन कर रहे उनसे राजस्व वसूली अधिक से अधिक लाने के लिये प्रतिदिन नये नये आंकडे दिये जाते हैं और साथ शासन से चलायमान योजनाएं, सर्वे जैसे कार्य भी वसूली के साथ साथ करने को लेकर दबाब बनाया जाता हैं,
नगरपालिका में जो कार्यालय अधीक्षक हैं वह लोकल होने के कारण किस कर्मचारी से क्या काम लिया जाता है सारी जानकारी हैं परंतु इस विषय पर वो गंभीर नही है अपने पद की गरिमा बनाये रखते हुये निष्पक्ष होकर सभी से काम लेना चाहिए शहर की राजनैतिक गतिविधियों के कारण या अपने संरक्षण के कारण उन कर्मचारियों पर काम के लिए दबाब नहीं बनाते लेकिन सभी कमाई वाली टेबलो पर ऐसे कई कर्मचारी हैं जो नगरपालिका में दैनिक वेतन पर पदस्थ थे और नियमितीकरण होने के बाद भी पदस्थ हैं जिनकी सेवाये एक ही टेबल पर काम करते हुये 25 से 30 वर्ष का समय व्यतीत हो गया हैं उनकी टेबल बदलने से जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना शाखा से फाईले गुमी हैं वैसे ही कई महत्वपूर्ण फाईल टेबल बदलने से गुम हो जायेगी जो ठेकेदार भुगतान को लेकर कमीशन कम देता हैं उनकी भी कई फाईल लेखा शाखा में गुम होती आई है नगरपालिका फाईले गुम होना आम बात है टेबल बदलने से भ्रष्टाचार उजागर हो जायेगा इसलिए टेबल पर पदस्थ कर्मचारी नहीं बदले गये अब तो ऐसे वर्षो से एक ही टेबल पर पदस्थ कर्मचारी सेवानिवृत्ति के पश्चात ही अपनी टेबल छोडेगे ऐसा अनुमान है, मजदूर संघ न्याय और नीति वाला कर्मचारी संगठन हैं जिसका नारा ही हैं कि “देश के हित में करेगें काम काम के लेगें पूरे दाम” जैसी सोच वाला कर्मचारी संगठन हैं भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का पुरजोर विरोध करता हैं मजदूर संघ और विरोध करता रहेगा, मजदूर संघ अपेक्षा ही नहीं आशा भी करता हैं कि नगरपालिका सीएमओ अपनी कथनी और करनी को स्पष्ट करते हुये नगरपालिका में पदस्थ किसी भी विभाग के महिला पुरूष कर्मचारी जो बिना कार्य के प्रतिमाह वेतन प्राप्त कर रहे हैं उनके प्रति दंडात्मक कार्यवाही के पहले वो जिस पद पर नगरपालिका में पदस्थ हुये हैं उनसे काम लिया जावे मजदूर संघ उनके ऐसे निर्णयों का स्वागत करता हैं लेकिन कार्यवाही चेहरा देखकर नहीं निष्पक्ष होना चाहिए।
प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट

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