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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा वर्ष में एक ही दिन 16 कलाओं से युक्त होता है

होशंगाबाद -(इटारसी) शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा वर्ष में एक ही दिन 16 कलाओं से युक्त होता है, श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर में परंपरागत रूप से मनाई गई शरद पूर्णिमा, लकड़गंज स्थित मंदिर में प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा का आयोजन संपूर्ण धार्मिक आस्था एवं नियमों के अनुसार ,मनाया गया, मंदिर के पुजारी पंडित सत्येंद्र पांडेय ने यजमान प्रवीण अग्रवाल एवं समिति के कोषाध्यक्ष दीपक जैन ने विधिवत पूजन अर्चन करवाई एवं 16 कलाओं से युक्त शीतलता प्रदान करने वाले पूर्णमासी के चंद्रमा के संबंध में विस्तार से कथा सुनाई। पंडित सत्येंद्र पांडेय ने कहा कि दुनिया में हम भारतवासी हैं जो शरद पूर्णिमा के महत्व को समझते हैं। चंद्रमा में कई कला होती है जो समय पर आती है और लोप भी हो जाती है, परंतु वर्ष में एक समय ऐसा आता है जब आश्विन पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होता है, शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सुख देने वाला माना गया है, शरद पूर्णिमा का त्यौहार उत्तर भारत में प्रत्येक हिंदू परिवार धूमधाम से मनाता है एवं खीर बनाकर मध्य रात्रि के चंद्रमा को अर्पित कर उसका प्रसाद सभी को वितरित किया जाता है, कहते हैं कि भगवान विष्णु शरद पूर्णिमा के समय अपने विशाल शांत स्वरूप में होते हैं एवं भक्तों को पसंद करते हैं, मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रमोद पगारे ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर सोशल डिस्टेंस का पालन कराते हुए पूजन अर्चन एवं प्रसाद वितरण की कार्यवाही करवाई, समिति के सचिव जितेंद्र अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया, सदस्यगण सुनील दुबे, गोपाल नामदेव ,उदित दुबे आदि का सहयोग प्रशंसनीय रहा। प्रदीप गुप्ता की

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