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नजर आया करवा चौथ का अर्द्ध चाँद, सुहागिनों ने खोला व्रत

नजर आया करवा चौथ का अर्द्ध चाँद, सुहागिनों ने खोला व्रत

कुंवारी कन्याओं ने भी व्रत रख कर, अच्छे वर की कामना

हरदा संवाददाता कुलदीप राजपूत
हरदा खबर- देश भर में शहरों साथ साथ गाँव गाँव में भी अधिकांश जगहों पर करवा चौथ व्रत सुहागन महिलाओं व कुआरी कन्याओं ने भी करवा चौथ का ब्रत रखा गया। माना जाता है कि करवा चौथ पर चांद देखने के बाद ही सुहागन महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में किया जाता है। महिलाएं पति के मंगल एवं दीघार्यु की कामना के लिए निर्जला रहकर इस व्रत को रखती हैं।
करवा चौथ का चांद बुधवार की रात 9 बजे चांद निकलने शुरू हुआ और सुहागन महिलाओं ने पूजा पाठ करना प्रारंभ कर दिया था जब चांद नजर आ गया तो। चांद का दीदार करने के बाद चंद्रमा निकल आया तो सुहागिनों ने निर्जला व्रत खुला व कुंवारी कन्या ने भी चंद्रमा की पूजा कर अपना व्रत को खोला गया।

चंद्रमा की नही बल्कि ,भगवान शिव ,पार्वती , कार्तिकेय की भी होती है पूजा———-

पंडित ज्योतिषी पंडित राघवेंद्र दुबे ने बताया कि संतान स्त्रियों के लिए करवा चौथ का व्रत अखंड सुहाग को देने वाला माना गया है । पति की दीर्घायु व अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है ,और महिलाएं से इस व्रत को श्रद्धा से रखती है ।श्रद्धा का अर्थ श्रद्धाया गुरु वेदांग परम वाक्य विधि श्रद्धा होता है। कुंवारी कन्या इस व्रत को रखती है तो अच्छे वर की कामना करती है। कार्तिक मास के पक्ष बनाने वाला पर्व करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा ही नहीं बल्कि भगवान शिव पार्वती व भगवान कार्तिक की की भी पूजा की जाती है।

पूजा कर, 16 श्रृंगार व मिठाई बाटी—–
करवा चौथ पर महिलाएं ने 16 श्रृंगार किया गया।चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया गया। सुहागन महिलाओं द्वारा अपने पति की आरती की उतारी व तिलक लगाकर, कलस से जल पिलाकर उपवास को खोला गया और फिर सुहागन महिला द्वारा पति को छननि से अर्ध चांद में देखा गया। सुहाग की 16 श्रृंगार सिंदूर,, बिंदी, काजल, मेहंदी व मिठाई इत्यादि की चीजे बाटी गई।

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