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समाज के प्रति व्यक्ति का दृष्टिकोण।

समाज के प्रति व्यक्ति का दृष्टिकोण।

परेऊ बाड़मेर से वागाराम बोस की रिपोर्ट

परेऊ/बाड़मेर मानव जीवन मिला है, हम गरीबी से ऊपर उठकर यहां तक आए हैं। अपने व्यक्तिगत कार्यों साथ-साथ अपने समाज के लिए जितना अच्छा हो सकता है वह करने की कोशिश करनी चाहिए।नकारात्मक सोच से किया गया सेवाकार्य कदापि आगे नही बढ़ पायेगा,प्रगृति के लिए सकारात्मक सोच और शुद्ध मानसिकता से किए गए कार्यों से समाजोउत्थान कर जन हितार्थ हेतु लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सकती हैं।
समाज में सामाजिक शुद्धता का भयमुक्त वातावरण होना अनिवार्य हैं। विरोधाभाषी मानसिकता कार्यशैली से सामाजिक सेवाएं अवरुद्ध होती हैं। निःस्वार्थभाव से किया गया सेवाकार्य फलीभूत ओर लाभदायक होता हैं, सकारात्मक सोच से सेवाकार्य करने से समाज का गौरव बढ़ता हैं तथा व्यक्ति स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हैं। इसलिए सेवा ही सबसे बड़ा सन्तोष धन हैं। “करो सेवा खाओ मेवा”
व्यक्ति समाज को सर्वोपरी रखे, व्यक्ति अपने आप को गौण रखे,सेवाओं में हमारे दृष्टिकोण शंकुचित नही बल्कि व्यापक होने चाहिए।
समाज में सबका साथ सबका विकास के मूलसूत्र को प्रार्थमिकता देना प्रगृति की राह पर अग्रसर होना हैं।

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