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आखिर शासकीय अधिकारी अपने पदों का दुरुपयोग किस तरह करते हैं

होशंगाबाद-आखिर शासकीय अधिकारी अपने पदों का दुरुपयोग किस तरह करते हैं एक ताजा उदाहरण हमें देखने को मिला महिला एवं बालविकास विभाग महिलाओं, बच्चों के स्वास्थ्य की देख रेख एवं बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कार्यरत है। इसके लिए सरकार से भारी भरकम राशि भी विभाग को मिलती है, किंतु विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के चलते बच्चे भले ही कुपोषण से बाहर न निकले हों लेकिन विभाग के आला अधिकारियों का कुपोषण जरूर दूर हो गया है वह आर्थिक रूप से सुपोषित हो रहे है। हाल ही में विभाग में साड़ी खरीदी का बड़ा खेल चल रहा है जिसमें विभाग के अधिकारियों ने हर ब्लाक में एक-एक दुकान निश्चित कर दी है। विभाग के सुपरवायजर कार्यकर्ताओं को उन चयनित दुकान से ही साड़ी खरीदने के लिए दबाव डाल रही हैं। सुपर वायजरों के निर्देश हैं कि कार्यकर्ता को संबंधित दुकान से दो साडिय़ा खरीदना है और उसका बिल व्हाटसप पर डालना है तभी माना जाएगा कि उन्होंने साड़ी खरीद ली है। दरअसल यह खेल तब शुरु हुआ था जब भाजपा की सरकार आते ही इमरती देवी को पुन: महिला बालविकास विभाग का मंत्रालय दे दिया गया था। वह कांग्रेस के समय भी इसी विभाग की मंत्री थी। उन्होंने आते ही आदेश दे दिया कि वर्तमान में जो गुलाबी साडिय़ां कार्यकर्ता और सहायिकाए पहन रही है उसे बदला जाए। उनके आदेश पर विभाग ने नये कलर और डिजाइन की साडिय़ा पहनने के आदेश दे दिए। इसके लिए विभाग ने प्रत्येक कार्यकर्ता के खाते में 4सौ रूपए प्रति साड़ी की दर से 8-8सौ रूपए डाल दिए। किंतु लॉकडाउन के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने साडिय़ां खरीदी भी ली, इसके बाद फिर विभाग में यह चर्चा निकली कि अब यह साडिय़ां भी नहीं चलेंगी। जल्द ही इनमें बदलाव होगा, जिन कार्यकर्ताओं ने यह साडिय़ां नहीं खरीदी है वह अभी साड़ी नहीं खरीदें। किंतु पिछले एक सप्ताह से जिले के सभी ब्लॉकों में सुपर वायजर कार्यकर्ताओं पर साड़ी खरीदने का दबाव बना रही है। विभाग ने वाकायदा हर ब्लाक में दुकान निश्चित कर दी है। जानकारी के अनुसार जिस दुकान को साड़ी के लिए निश्चित किया है वहां 400 रूपए की साडिय़ां बैची जा रही है, जबकि उसी गुणवत्ता की साड़ी दूसरी दुकानों पर 200 रूपए मिल रही है। किंतु विभाग की सुपर वायजर निश्चित दुकान से साड़ी खरीदने के लिए दबाव बना रही है। चर्चा तो यह भी है कि उक्त दुकान से विभाग का कथित रूप से कमीशन भी तय है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर उन्होंने 400 रूपए प्रति साड़ी के दर से साड़ी खरीदी तो साड़ी के साथ पेटीकोट और ब्लाउज उन्हें अपने पैसे से खरीदना पड़ेगा। जबकि दूसरी दुकानों पर उसी उन्हें सारे कपड़े मिल रहे है। लेकिन सुपर वायजरों के दबाव के कारण उन्हें निश्चित दुकान से कपड़े खरीदना पड़ रहा है, इस मामले में जल्द से जल्द जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होना चाहिए जिससे कभी भी भविष्य में कोई इस तरह की पुनरावृत्ति ना कर सके। प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट

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