अस्पताल के कोई भी डॉक्टर मदद हेतु सामने नहीं आए

छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा जिला अस्पताल बिरगांव में एक महिला जो की गर्भवती थी उसके प्रसव हेतु जिला अस्पताल के कोई भी डॉक्टर मदद हेतु सामने नहीं आए यह घटना छत्तीसगढ़ के शासन एवं प्रशासन पर सवाल खड़ा करती है जिस पर युवा मोर्चा एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता सवाल लेकर सामने खड़े हैं एवं प्राप्त जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अश्विनी गुप्ता के द्वारा कुछ सवालों के जवाब सरकार है जो कि निम्न है

छत्तीसगढ़ में ये पहली घटना नहीं है,इससे पहले भी ऐसी ही तीन घटनाएं और हो चुकीं हैं फ

छत्तीसगढ़ के हर गरीब की आज यही कहानी हैं,वो बेचारा आर्थिक तंगी की वजह से निजी-चिकित्सालय जा नहीं सकता, और सरकारी-चिकित्सालय में उसकी कोई सुनता नहीं…फिर वो जाये तो जाये कहाँ..?करे तो करे क्या…

एकबार ये मान भी लें कि छत्तीसगढ़ सरकार निकम्मी हैं,उससे कुछ न हो पायेगा…लेकिन उस चिकित्सालय में तैनात डॉक्टरों की संवेदना क्यों मर गई..?
आखिर एक गरीब से जानवरों जैसा व्यवहार क्यों..

भूपेश-सरकार की चमड़ी इतनी मोटी हो चूकी है कि इस तरह की घटना से इनके कान मे जूँ तक नहीं रेगंती…
इसके पहले भी अस्पताल की चौखट पर प्रसव होने की घटना हो चुकी है,अगर उस समय ठोस कार्यवाही हो गई होती तो पुनः बिरगांव में पुरावृत्ति नहीं होती..!

कांग्रेस सरकार से सीधा सवाल है…
जब रोड, रास्ते व चौखट में ही प्रसूता की डिलीवरी होना है तो सरकारी-अस्पतालों का क्या अवचित्य है..?? या तो स्वास्थ्य सविधाएँ गरीब की पहुंच में रहें या फिर बंद कर दीजिए सभी सरकारी अस्पताल…आपसे न हो पायेगा..!!

*सौरभ कुमार चौबे की रिपोर्ट*

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