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केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया,

होशंगाबाद – केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया,
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स ( एन सी सी ओ ई ई ई ) के आह्वान पर आज देश के सभी प्रांतों के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने केन्द्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में जोरदार राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया ।
म.प्र . यूनाईटेड फोरम फार पावर एम्लाईज एवं इंजीनियर्स के संयोजक व्ही. के. एस .परिहार द्वारा बताया कि कोविड -19 महामारी के बीच केन्द्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर आमादा हैं जिसके विरोध में देश भर के बिजली कर्मियों ने आज प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया । देश भर में लाखों बिजली कर्मियों ने विरोध सभाएं व प्रदर्शन कर निजीकरण के उद्देश्य से लाये गए इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट को निरस्त करने की माँग की और चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वापस न की गई तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी । संगठन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी लोकेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से निजीकरण विरोधी आन्दोलन में सहयोग करने की अपील की और कहा कि निजीकरण के बाद सबसे अधिक नुक्सान आम उपभोक्ताओं का ही होने जा रहा है । उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी और सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी । वर्तमान में म.प्र . में बिजली की लागत लगभग रु 6.50 प्रति यूनिट है और कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनियों को कम से कम 16 % मुनाफा लेने का अधिकार होगा जिसका अर्थ यह हुआ कि 8 रु प्रति यूनिट से कम दाम पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलेगी ।
उन्होंने बताया कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट के अनुसार निजी कंपनियों को डिस्कॉम की परिसंपत्तियां कौड़ियों के दाम सौंपी जानी है , इतना ही नहीं सरकार डिस्कॉम की सभी देनदारियों व घाटे को खुद अपने ऊपर ले लेगी और निजी कंपनियों को क्लीन बैलेन्स शीट कर डिस्कॉम दी जाएगी । निजीकरण के सरकार के दस्तावेज के अनुसार सरकार बाजार से महँगी बिजली खरीद कर निजी कंपनियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराएगी जिससे उन्हें घाटा न हो । नई नीति के अनुसार डिस्कॉम के 100 % शेयर बेंचे जाने है और सरकार का निजीकरण के बाद कर्मचारियों के प्रति कोई दायित्व नहीं रहेगा । कर्मचारियों को निजी क्षेत्र के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा ।
उन्होंने बताया कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांग है – तेलंगाना सरकार की तरह बिजली सेक्टर में कार्यरत सभी संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाये । बिजली कंपनियों का एकीकरण कर केरल के केएसईबी लिमिटेड की तरह सभी प्रांतों में एसईबी लिमिटेड का पुनर्गठन किया जाये जिसमे उत्पादन , पारेषण और वितरण एक साथ हों , निजीकरण और फ्रेंचाइजी की सभी प्रक्रिया निरस्त की जाये और चल रहे निजीकरण व फ्रेंचाइजी को रद्द किया जाये , सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। जिला संयोजक बीसी पांडे ने बताया निजीकरण के विरोध का कार्यक्रम होशंगाबाद, इटारसी, हरदा ,सुहागपुर ,पिपरिया डिवीजन पर एवं सभी वितरण केंद्र लेवल पर किया गया। उप महाप्रबंधक होशंगाबाद, इटारसी, सोहागपुर, पिपरिया, हरदा एवं सभी सहायक यंत्री कनिष्ठ यंत्री व सभी संविदा कर्मी आउटसोर्स कर्मचारियों उपस्थित रहे।
प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट

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