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कोल श्रमिकों की एक दिवसीय हड़ताल रही सफल।

कोल श्रमिकों की एक दिवसीय हड़ताल रही सफल।

बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

कोल इंडिया ने संयुक्त मोर्चा को लेकर श्रमिक संगठन एटक, एचएमएस, और सीटू ने केंद्रीय स्तर पर सरकार को दिए 26 नवंबर को एक दिवसीय हड़ताल जो कि लगभग सफल मानी जा रही। बताया जाता है कि पाथाखेड़ा क्षेत्र में प्रथम पाली जनरल शिफ्ट में खदानों का 1979 कामगारों में से 1818 खदान कामगारो ने खदान ना जाकर हड़ताल 80 प्रतिशत सफल बनाया।
वही खदान के अलावा विभाग में ज्यादातर लोग कार्य पर आए। संपूर्ण क्षेत्र का प्रथम पाली में 2421 वैसे 1929 कामगारों ने हड़ताल पर रहकर 71 प्रतिशत सफल बनाया और कोयला मजदूर ने एकता का प्रतीक दिया। जबकि हर बार की तरह इस बार भी पाथाखेड़ा क्षेत्र की सभी इकाई सभी खदानों के वर्करों ने हड़ताल को सफल और उत्पादन को रोका रखा। परंतु क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय में कोई हड़ताल का माहौल नहीं देखा गया। महाप्रबंधक कार्यालय के कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर काम करते दिखाए। वहीं अन्य विभाग और वर्कशॉप में भी हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। लेकिन पाथाखेड़ा क्षेत्र के भूमिगत और सरफेस में कार्य करने वाले खदानों के कामगारों ने जो तवा 1, तवा 2, सारणी माइंन शोभापुर माइंन, छतरपुर 1, छतरपुर ,2, खदान के कर्मचारी ने एक दिवसीय हड़ताल में प्रथम पाली में कुछ इस प्रकार सफलता शोभापुर माइन में 83 % सफल हड़ताल रही। सारणी माइंन में 75% तवा खदान में 85% तवा टू में 90% छतरपुर माइंस में 80% और छतरपुर में 65% सफलता रहीं, वही कामन खदान महाप्रबंधक कार्यालय वर्कशॉप अन्य विभाग में हड़ताल का कोई खास असर नहीं दिखा। जबकि वहां क्षेत्र के सभी श्रमिक नेता एकत्रित होते हैं। कामन शाखा का मात्र 18% हड़ताल सफल रही। ज्ञात हो कि 3 दिनों से खदानों पर तीनों पाली में द्वार सभा हुई। जिसमें श्रमिक नेताओं ने कामगारों का सरकार की नीतियों से अवगत कराया। हड़ताल का मूल उद्देश्य बताया कि कोयला का कमर्शियल होना सरकारी उद्योग का निजीकरण होना आश्रित को नौकरी ना मिलना और देश की संपदा को निजी मालिकों को बेचना लेकर मुद्दे है। जिसमें एटक के अध्यक्ष एल झरबड़े, महामंत्री श्रीकांत चौधरी, जेसीसी हबीब अंसारी राकेश वाईकर, इदरीश इंटक अध्यक्ष आशिक खान महामंत्री भरत सिंह उपाध्यक्ष सादिक रिजवी दामोदर मिश्रा आलोक सोलंकी महेंद्र यासीन खान धनराज निजात अन्य श्रमिक नेताओं ने खदानों में द्वार सवाली और सरकार विरोधी नीतियों को कामगारों के बीच रखा गया और हड़ताल को सफल बनाया।

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