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ऐसे बरबाद कर दिये करोड़ों के डस्टबिन

ऐसे बरबाद कर दिये करोड़ों के डस्टबिन

विजय कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट
होशंगाबाद -शहर को स्वच्छ बनाने के लिये तीन साल पहले करीब 4 करोड़ की लागात से डस्टबिन खरीदे गये थें। जिन्हें शहर के मुख्य-मुख्य मार्गो पर रखवाया भी गया था। उनमें से ज्यादातर डस्टबिन गायब हो गये हैं। केवल इक्का-दुक्का टुटे-फुटे डस्टबिन ही अब नजर आते है।जिन-जिन स्थानों पर रखे गये डस्टबिन गायब हुए हैं। वहां दोबारा नगर निगम ने वर्ष 2017 में प्लास्टिक के 1 लाख 88 हजार डस्टबिन खरीद थे। जिनकी कीमत करीब 3 करोड़ 80 लाख रूपये थी डस्टबिन नहीं रखे गये हैं जिससे लोग कचरा इधर-उधर फेंकने लगे हैं। । कुछ मात्रा में स्टील के भी डस्टबिन दो साल भी नहीं चल पाए हैं। जानकार बताते हैं कि खरीदे गये डस्टबिन घटिया क्वालिटी के थे और इसीलिए कुछ ही समय में ये टूट-फूट गये थे। ज्यादातर डस्टबिन निगम के सफाई कर्मियों से टूटे हैं। जब वे डस्टबिन से कचरा अपनी गाड़ी में पलटाते थे तो तभी ये अचानक टूट जाते थें।
स्टील के डस्टबिन भी लापता
पुराने डस्टबिन के नष्ट होने के बाद निगम ने स्टील के डस्टबिन खरीदकर लगाने की बात कही गई थी। अधिकारियों का कहना था कि स्टील के डस्टबिन से सफाई कर्मियों केा कचरा निकालने और पलटाने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी । बताया जाता है कि कुछ स्थानों पर स्टील के डस्टबिन लगवाये भी गये थे लेकिन वह भी गायब हो गये है।
घरों में बांटे गये डस्टबिन भी नष्ट हो गये
नगर निगम ने स्वच्छता अभियान के तहत घर-घर में डस्टबिन बंटवाए थे। बताया जात है कि वे भी टूट-फूटे प्लास्टिक के डस्टबिन कबाड़ियों को बेच दिये हैं। सिविल लाईन क्षेत्र के लोग बताते हैं कि जो प्लास्टिक का डस्टबिन दिया गया था। वह एक साल में ही टूट गया था। वे सिर्फ उसमें कचरा डालते थे। डोर टू डोर की गाड़ी आती थी तो वे उसमें पलटा देते थे। इसके बाद भी वे चटक कर टूट गये।
ऐसे डस्टबिन थे जिससे कचरा तक नहीं निकलता था
निगम ने जो डस्टबिन खरीदे थें। वे यहां के लायक नहीं थे। जानकार बताते हैं कि कुछ लोग डस्टबिन में शराब की बोतल एवं कांच के टुकड़े डाल देते थे। जिससे कि सफाई कर्मियों को हाथ से निकालने में दिक्कत होती थी । कई बार सफाई कर्मियों के हाथ भी कट जाते थेें । इसलिये वे डस्टबिन को उठाकर सीधे कचरा गाड़ी मं पलटा देते थें । बार-बार डस्टबिन उठाने से वे टूअ गये। इसके बाद दुबारा कोई डस्टबिन नहीं रखा गय ।
जानबूझकर घटिया क्वालिटी के खरीदे थें
नगर निगम और स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि सार्वजनिक जगहों पर गुणवत्ताहीन डस्टबिन रखने का परिणाम क्या होगा। इसके बाद भी उन्होंनें ऐसे डस्टबिन खरीदे कर शहर में जगह-जगह रख दिये । जो एक साल के भीतर ही टूट फूट गये हैं। जानकार बताते हे कि जानबूझकर गुणवत्ताहीन डस्टबिन खरीदे गये थे ताकि बाद में पुनः दो साल पहले खरीदे गये प्लास्टिक के डस्टबिन लगभग हर वार्ड में मुख्य-मुख्य स्थानों पर लगवाए गये थे। ज्यादातर तो तहस-नहस हो गये हैं। कई गायब भी हो गये । जो शेष बचे हैं उसे नगर निगम द्वारा निकलवा लिया गया। उसे कबाड़खाने में डाल दिया गया था। कबाड़ वाले डस्टबिन जोन कार्यालयों के कबाड़खानों में पड़े थे। वहां से भी वे गायब हो गये है।

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