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बैंकों की रहमत हो तो वेंडरों को ₹10000 ऋण मिले करुणा संक्रमण काल में आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके

बैंकों की रहमत हो तो वेंडरों को ₹10000 ऋण मिले करुणा संक्रमण काल में आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके रोजाना कमाने खाने वालों की राहत के लिए मध्यप्रदेश सरकार ₹10000 की सहायता बतौर ऋण दे रही थी जिसके लिए पूरा मसौदा तैयार किया गया नगर पालिका को इसके लिए यह कार्य सौंपा गया ताकि सर्वे संरक्षण करने के बाद पात्र हितग्राहियों का स्ट्रीट वेंडर योजना के तहत ₹10000 की सहायता जलाई जा सके लेकिन शहर में यह योजना बैंकों की चौखट पर ही दम तोड़ती नजर आ रही है कई महीनों से बैंकों में हितग्राहियों के प्रकरण को हरी झंडी नहीं मिल पा रही है अगर बेस्ट स्ट्रीट वेंडर के आवेदनों पर अपनी रहमत दिखाएं तो कम से कम हजारों से अधिक लोगों को ₹10000 का आसानी से मिल जाएगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी उन्होंने कुछ खुशियों से ब्याज पर पैसे लिए हैं वह भी दिल जाएंगे लेकिन बैंकों की मनमानी के कारण लोगों को मदद नहीं मिल पा रही है और पद विक्रेता काफी परेशान हो रहे हैं अपने दस्तावेज नगर पालिका में जमा कर चुके हैं और अब बैंक के चक्कर लगा रहे हैं विगत दिनों पहले कुछ हितग्राहियों को फटाफट रेल बैंक ने दे दिया इसके बाद बचे हुए 1 रनों की स्कूटनी करने की बात कही जिसके बाद से ही जो प्रकरण बैंकों में फंसे तो बैंकों में ही फंसे रह गए पीड़ित आज भी यही कह रहे हैं कि आज योजना के तहत ₹10000 का लाभ कब मिलेगा इसके बारे में अब तो नगरपालिका अधिकारी भी कुछ नहीं कह रहे हैं वैसे मैं भी अपना सारा काम छोड़कर दिनभर बैंकों के चक्कर काट रहे हैं कल आज फिर परसों आना अभी नहीं इंतजार करो कहीं जा रही है ऐसी बातें करते हैं और उन्हें दुत्कार कर बैंकों से भगा दिया जाता है वैसे मैं तो कई हितग्राही में दौड़ भाग के कारण इस तरफ ध्यान देना ही छोड़ दिया है बाकी जिन को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है आज भी वह रोजाना भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है सिविल और आर्थिक हालातों पर बैंकों की नजर बैंक पैसा लेने वालों की आर्थिक स्थिति देख रही है कि वह राशि दे पाएगा कि नहीं या फिर खा जाएगा दूसरी तरफ सिविल को भी जा जा जा रहा है जिनकी सिविल खराब है उनको नहीं दिया जा रहा है आधार कार्ड से ही से मिलकर एक की जा रही है नहीं मिलने पर अब तो कार्यालयों में हितग्राहियों की भीड़ दिखाई देती है अधिकारियों से सवाल कर रही है आखिर इन आवेदनों पर क्या कार्रवाई होगी तब सहायता मिलेगी सबसे ज्यादा सहायता की आवश्यकता भी है आर्थिक स्थिति बदहाल करीब परेशान हो रहा है बंद कारोबार को चालू करने के लिए लोगों ने इधर.उधर से उधार लिया है जिसकी किस्त देनी पड़ती है पहले से लोन लेने वालों के सामने बड़ी समस्या इसलिए नहीं मिलता लोन आर्थिक जर्मन मोबाइल सहित अन्य फाइनेंस करवाने के लिए पहले ही लोन लिया हुआ है इस कारण मौजूदा लोगों को स्टील का लाभ नहीं मिल पा रहा है इस संबंध में नगर पालिका अधिकारी से बात करनी चाहिए फोन रिसीव नहीं कर पाए फल सब्जी वालों को मिलना है लाभ मगर इन छोटे कारोबारी लंबे समय से रहने के कारण चलते विक्रेता फल लगाने वाले कपड़े बेचने वाले सामने समस्या खड़ी हो गई है इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री योजना लागू की है छोटे बच्चे के पास होने का इंतजार है यही कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है
राजेंद्र गोस्वामी की रिपोर्ट

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