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जिला स्तरीय निगरानी दल द्वारा बदलते मौसम में

जिला स्तरीय निगरानी दल द्वारा बदलते मौसम में

रबी फसलों को कीटव्याधि से बचाव हेतु किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी

होशंगाबाद/21,जनवरी, 2021/ विगत दिनो से जिले में बादलयुक्त मौसम रहने से बारबार तापमान परिवर्तित हो रहा है, ऐसे मौसम में गेहूं, चना एवं मसूर आदि फसलों में कीटव्याधि का प्रकोप बढ़ जाता है। बुधवार को फसल निगरानी दल द्वारा विकासखंड होशंगाबाद के ग्राम रोहना, सांवलखेड़ा, बैराखेड़ी, डोलरिया, शैल, रतवाड़ा तथा विकासखंड सिवनीमालवा के ग्राम भरलाय, भमेड़ीदेव, पगढाल, नवलगांव, भैरोपुर, शिवपुर, भिलाड़ियाखुर्द आदि ग्रामों का भ्रमण कर फसल स्थिति का निरीक्षण किया गया। जिला स्तरीय फसल निगरानी दल में आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र पंवारखेड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ.केके मिश्रा, अनुविभागीय कृषि अधिकारी होशंगाबाद राजीव यादव, ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी एसएस अली आदि शामिल थे। निगरानी दल के सदस्यों ने फसलों के निरीक्षण उपरांत किसानो को बताया की अधिकांशत: फसल स्थिति बेहतर है, कुछ स्थानों पर फसलों में आंशिक रूप से कीटव्याधि का प्रकोप है। निगरानी दल सदस्यों ने किसानो को समसामयिक सलाह देते हुए कहा कि गेहूं फसल में आर्मी वर्म (फोजी कीट) की नवजात इल्लियां छोटे पौधो की जड़ के पास से एवं बाली की अवस्था पर बल्लियों को काटकर जमीन पर गिरा देती है, इन इल्लियों की संख्या काफी अधिक होने पर यह सेना की तरह हवा के झोंके के साथ फसल को काटती चली जाती है तथा रात्रि के समय अधिक हानी पहुँचाती है अत: किसान भाई इसके नियंत्रण के लिए इमामैक्टीन वेन्जोएट 250 ग्राम प्रति हेक्टर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर छिड़काब करे। इसी तरह से गेहूं फसल में जड़ माहू का प्रकोप होता है, यह कीट फसल की पौध एवं कंसा अवस्था पर जड़ो में रस चूसकर नुकसान पहुँचाते है जिससे 40 से 50 प्रतिशत तक पैदावार में कमी आ जाती है। इसके नियंत्रण हेतु किसान भाईयो को सलाह दी गई है कि वे इसके नियंत्रण हेतु क्लोरोपायरीफास 20 ईसी कीटनाशक की 1.25 से 1.50 लीटर मात्रा प्रति हेक्टर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 180 मि.ली. प्रति हेक्टर अथवा थायोमेथाक्जाम 25 डब्लूजी की 125 ग्राम मात्रा का प्रति हेक्टर की दर से प्रकोपित फसल पर छिड़काब करें। निगरानी दल ने किसानो को बताया कि खेत की खड़ी फसल में दवा का छिड़काब करते समय खेत में उपयोग की जाने वाली दवा के साथ-साथ पानी की मात्रा का उपयोग करने का बहुत महत्व है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे बताई गई दवाएं पंजीकृत विक्रेता से ही क्रय करे एवं पानी की मात्रा 500 से 700 लीटर प्रति हेक्टर फसल की बढ़वार के अनुसार उपयोग करें। दवा का छिड़काब इस प्रकार करे कि पौधे के पूरे वानस्पतिक भागों में दवाई लगे। निगरानी दल ने किसान भाईयों को बताया कि चना फसल को प्रारंभिक अवस्था में कटुआ इल्ली नुकसान पहुँचाती है, यह हरे अथवा भूरे रंग की इल्ली रात्रि में निकलकर छोटे पौधे की शाखाओं का काट कर जमीन पर गिरा देती है। किसान भाई कटुआ इल्ली पर नियंत्रण हेतु क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी एक लीटर कीटनाश्क दवा को प्रति हेक्टर की दर से या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी को 1.50 लीटर प्रति हेक्टर की दर से 400 से 500 लीटर पानी मिलाकर प्रकोपित फसल पर छिड़काब करे।

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