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15 मार्च को मनाया जाएगा देश में निजीकरण विरोधी दिवस।

15 मार्च को मनाया जाएगा देश में निजीकरण विरोधी दिवस।

बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

संयुक्त किसान मोर्चा और संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियन द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 1 मार्च को आयोजित अपनी संयुक्त बैठक में केन्द्रीय श्रमिक संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त मंच ने आने वाले दिनों में श्रमिकों और किसानों की बढ़ती एकता को मजबूत करने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। वही इस तथ्य की सराहना की गई कि किसानों ने 26 नवंबर को ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बुलाए गए सभी आंदोलन कार्यक्रमों में केन्द्रीय ट्रेड यूनियन के संयुक्त मंच द्वारा एकजुटता कार्यों सहित लगातार समर्थन करता आ रहा है । संयुक्त किसान मोर्चा सहमत थे कि किसानों की भूमि को बचाने, अनुबंध खेती को रोकने और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के साथ-साथ राष्ट्रीय हित में बिजली संशोधन विधेयक में उनके संघर्ष को तेज करने की आवश्यकता है और वे दृढ़ता से किसानों के उत्पादन को न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैध बनाने और सुनिश्चित करने में विश्वास करते आ रहे है । केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त किसान मोर्चा प्रतिनिधियों को सरकार के खतरों से अवगत कराया और राष्ट्रीय संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों पर भारत की संप्रभुता के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण के फैसले और देश के श्रमिकों पर चार श्रम कानून का गंभीर प्रभाव बताया। चार संहिताओं ने मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कार्यस्थल सुरक्षा मानदंडों से श्रमिकों को शोषण और श्रमिकों को छोड़कर यूनियनों के गठन और संरक्षण का अधिकार छीन लिया है। 1 मार्च को बैठक में निर्णय लिया गया है की है देश के सभी रेलवे स्टेशनों के पास / सामने प्रदर्शन कर 15 मार्च को विरोधी निजीकरण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। वही संयुक्त किसान मोर्चा ने 15-16 मार्च को बैंकों की हड़ताल,17 मार्च को जीआईसी यूनियनों तथा 18 मार्च को लाइफ इंश्योरेंस यूनियनों की हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। साथ ही साथ केन्द्रीय ट्रेड यूनियन ने 6 मार्च 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित काले झंडों के साथ-साथ उड़ते हुए काले झंडे और मकानों के ऊपर पांच घंटे के लिए कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे की नाकाबंदी को अपना समर्थन दिया है।

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