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कोरोना काल में सरकार रख रही किसानों का विशेष ख्याल – गिरिश नागपाल कहा- ढैंचा (हरी फसल) का बीज 80% अनुदान पर उपलब्ध

कोरोना काल में सरकार रख रही किसानों का विशेष ख्याल – गिरिश नागपाल
कहा- ढैंचा (हरी फसल) का बीज 80% अनुदान पर उपलब्ध
अम्बाला, 7 मई, (जयबीर राणा थंबड़)। उपकृषि निदेशक गिरीश नागपाल ने बताया कि कोरोना माहामारी के बीच सरकार किसानो का भी पूरा ध्यान रखे हुए है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि जिला उपायुक्त अशोक शर्मा द्वारा कृषि विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हरियाणा सरकार द्वारा कृषि लागत कम करने व मृदा स्वास्थ्य मनाये रखने के उद्देश्य से, खरीफ मौसम में फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत ढैंचे का बीज 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाया जा रहा है, इसकी जानकारी जिला के सभी किसानों को मुहैया कराई जाए। गिरीश नागपाल ने बताया कि उपायुक्त अशोक शर्मा के हरसंभव प्रयास रहता है कि किसानों को सरकार द्वारा दी जा रही सभी सुविधाओं की जानकारी हो तथा किसानों को किसी प्रकार की कोई समस्या न‌ रहे।
उन्होंने बताया कि ढैंचा फसल के यह बीज इच्छुक किसान हरियाणा बीज विकास निगम की सभी दुकानों से प्राप्त कर सकते हैं। बीज लेने के लिये किसान को आधार कार्ड, वोटर कार्ड या किसान क्रेडिट कार्ड पहचान के तौर पर दिखाना होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को दिये जाने वाले बीज का 80 प्रतिशत अनुदान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा दिया जायेगा तथा 20 प्रतिशत स्वंय किसान द्वारा दिया जायेगा। गिरीश नागपाल ने जानकारी देते हुए कहा कि एक किसान अधिकतम 60 किलोग्राम बीज ले सकता है यानि एक किसान 5 एकड़ का बीज अनुदान पर प्राप्त कर सकता है। किसान द्वारा अपना मोबाईल नम्बर दिया जाना भी अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिये उपकृषि निदेशक अम्बाला, सम्बन्धित उपमंडल कृषि अधिकारी, सम्बन्धित खंड कृषि अधिकारी कार्यालय से सम्पर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि ढैंचा फसल को हरी खाद के रूप में लेने से जमीन के स्वास्थ्य में जैविक, रासायनिक तथा भौतिक सुधार होते हैं। जलधारण की क्षमता बढ़ती है। ढैंचा की पलटाई कर खेत में सड़ाने से नत्रजन, पोटास, गंधक, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जस्ता, तांबा, लोहा आदि तमाम प्रकार के पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। ढैंचा फसल के बाद ली जाने वाली फसल का उत्पादन बढ़ जाता है। डीडीए ने कहा कि किसानों को इस लाभ लेना चाहिए। ढैंचा से जमीन की उर्वरा ताकत तो बढ़ती ही है, साथ ही जल संरक्षण और संर्वधन में भी फायदा मिलता है।

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