सत्य, अहिंसा, करुणा, दया, प्रेम और शांति का मार्ग दिखाने वाले भगवान बुध्द की 2565 जयंती मनाई।

सत्य, अहिंसा, करुणा, दया, प्रेम और शांति का मार्ग दिखाने वाले भगवान बुध्द की 2565 जयंती मनाई।

बैतूल/सारनी। कैलाश पाटील

सुजाता बुध्द विहार समिति शोभापुर कॉलोनी में तथागत गौतम बुद्ध की 2565 वी जयंती मनाई गयी। गौतम बुध्द का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था इसी दिन बोधगया पीपल के वृक्ष (बोधिवृक्ष) के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने महानिर्वाण की ओर प्रस्थान किया, यह तीनों घटना एक ही दिन हुई थी इसलिए इसे त्रिगुणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुध्द विहार शोभापुर कॉलोनी में कोविड-19 के नियमो का पालन कर बुद्ध प्रतिमा के समक्ष मोमबत्ती प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किया तथा सामुहिक रूप से बुध्द वंदना ली गयी तथा अध्यक्ष कमला पाटिल द्वारा बुध्द के शांति त्याग प्रेम के मार्ग पर उद्बोधन दिया, जिसमे सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखा गया साथ ही बुध्द के विचारों पर प्रकाश डाला गया एवं अहिंसा प्रेम के मार्ग पर चलने की शपथ ली गयी। खीर प्रसादी का वितरण कर कार्यक्रम की समाप्ति की गई ।
इस अवसर पर आयुष्मती शोभा बावरे, पूनम डोंगरे, कमलती वाईकर, मालती वरवड़े, उर्मिला दवंडे, लता लाऊतरे, कमला पाटिल, आरजू सातनकर, सत्या पाटिल, प्रमिला पाटिल, पार्वती पंडागरे, तुलसी उबनारे, भानु कापसे, भावना कापसे, बीना पाटिल, रविन्द्र वरवड़े आदि उपस्थित थे।

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