जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसान भाइयों को सूचित किया है कि शासन द्वारा विगत वर्षो की भाँति इस वर्ष 2022 में भी विशेष संचारी रोग नियन्त्रण अभियान

कौशाम्बी,
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसान भाइयों को सूचित किया है कि शासन द्वारा विगत वर्षो की भाँति इस वर्ष 2022 में भी विशेष संचारी रोग नियन्त्रण अभियान दिनांक 02 अपै्रल से 30 अपै्रल 2022 तक चलाया जा रहा है संचारी रोग जे0ई0 (जापानी इंसेफेलाइटिस) एवं ए०ई०एस० (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) के फैलने में चूहा एवं छछूंदर की भूमिका महत्वपूर्ण है। चूहा एवं छछूंदर के शरीर पर पाये जाने वाले चीगर्स के काटने से स्क्रबटाइफस नामक बीमारी फैलती है। आंकलन के अनुसार 40 प्रतिशत बीमारी स्क्रब टाइफस के संक्रमण के कारण होती है, जिसके वाहक चूहे एवं छछूंदर होते हैं, जिससे मनुष्यों में प्रकोप की सम्भावना बनी रहती है, इनका नियन्त्रण अति आवश्यक है, जिससे संचारी रोगो को फैलने से रोका जा सकें। उन्होंने बताया कि चूहे मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं. घरेलू एवं खेत के चूहे। घरेलू चूहा घर में पाया जाता है, जिसे चूहिया या मूषक कहा जाता है। खेत के चूहों में फील्ड रैट, साफ्ट फर्ड फील्ड रैट एवं फील्ड माउस प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त भूरा चूहा खेत व घर दोनों जगह पाया जाता है जबकि जंगली चूहा जंगलों, रेगिस्तानों, निर्जन स्थानों व झाड़ियों में पाया जाता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया है कि किसान भाई चूहों की संख्या को नियंत्रित करने के लिये अन्न भण्डारण पक्का कंकरीट तथा धातु से बने पात्रों में करना चाहिए, ताकि उनको भोज्य पदार्थ सुगमता से उपलब्ध न हो सकें। चूहे अपना बिल झाड़ियों, कूड़ों एवं मेड़ों आदि में स्थायी रूप से बनाते हैं, खेतों का समय.समय पर निरीक्षण एवं साफ सफाई करके इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। चूहेदानी का प्रयोग करके उसमें आकर्षक चारा जैसे. रोटी, डबल रोटी, बिस्कुट आदि रखकर चूहों को फँसाकर मार देने से इनकी संख्या नियंत्रित की जा सकती है। घरों में ब्रोमोडियोलान 0.005 प्रतिशत से बने चारे की 10 ग्राम मात्रा प्रत्येक जिन्दा बिल में रखने से चूहे उसको खाकर मर जाते हैं। एल्यूमीनियम फॉस्फाइड दवा की 3-4 ग्राम मात्रा प्रति जिन्दा बिल में डालकर बिल बन्द कर देने से उससे निकलने वाली फॉस्फीन गैस से चूहे मर जाते हैं।

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