राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 12 मई से 27 मई 2022 तक संचालित किया जायेगा।

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 12 मई से 27 मई 2022 तक संचालित किया जायेगा।

घर-घर जाकर फाइलेरिया की निःशुल्क दवा की जायेगी वितरित

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 के0सी0 राय की अध्यक्षता में मुख्य चिकित्साधिकारी सभागार में फाइलेरिया उन्मूलन मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्साधिकारी ने फाइलेरिया बीमारी की रोकथाम हेतु किये जा रहे कार्यों तथा फाइलेरिया बीमारी होने के कारण एवं उपचार आदि की विस्तृत जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि दवायें सभी सी0एच0सी0 एवं पी0एच0सी0 पर पहुॅच गयी हैं तथा आशाओं को भी उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही फेमली रजिस्टर एवं आई0ई0सी0 (वैनर, पोस्टर, लीफलेट, ब्रोसर) तथा लाजिस्टिक्स (चाक, पेन, रस्सी गोद) को भी उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि टीम उनके घर पर पहुॅचे तो वे सब दवा लेकर दवा अवश्य खायें, जिससे जनपद को फाइलेरिया बीमारी से मुक्त किया जा सकें।
कार्यशाला में नोडल अधिकारी वेक्टरबार्न डिजीज डॉ0 डी0एस0 यादव ने बताया कि शासन द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 12 मई से 27 मई 2022 तक संचालित किया जा रहा हैं। इस कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा-आइवर्मेक्टिन, डी0ई0सी0 व अल्बेन्डाजोल निःशुल्क दी जायेगी। उन्हांने बताया कि जनपद की लगभग 19 लाख की आबादी है, जिसमें 02 वर्ष कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं अत्यन्त गम्भीर बीमारी से पीड़ित लोगों को दवा नहीं खानी है। इस प्रकार लगभग 17 लाख लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलायी जायेगी। उन्होंने बताया कि 1619 टीमों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर दवा का वितरण करेंगी। इस टीम में आशा, आगनबाड़ी एवं एन0जी0ओ0 सम्मिलित है। उन्होंने बताया कि फ्रन्ट लाइन वर्कर्स एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है। यह दवा फाइलेरिया के परिजीवियों को मार देती है और हाथीपॉव जैसे बीमारियों से बचाने में मदद करती है। यह दवा पेट के अन्य खतरनाक कीड़ों को भी खत्म करती है। उन्होंने बताया कि 02 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गम्भीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों के अलावा यह दवा सभी को खानी है। यह दवा उम्र एवं ऊचाई के आधार पर दी जायेगी, यह दवा खाली पेट नहीं खानी है। दवा स्वास्थ्य कर्मी के सामने ही खाना जरूरी है। मरते हुए परजीवियों के प्रतिक्रिया स्वरूप कभी-कभी सरदर्द, शरीर में दर्द, बुखार, उल्टी, तथा बदन पर चकत्ते एवं खुजली जैसी मामूली प्रतिक्रियाएॅ देखने को मिलती हैं, घबरायें नहीं आमतौर पर ये लक्षण स्वतः ही ठीक हो जाते हैं।
नोडल अधिकारी वेक्टरबार्न डिजीज ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी मच्छर के काटने से फैलती है, जिसे सामान्यतयः हाथीपॉव के नाम से जाना जाता है। मच्छर के अन्दर फाइलेरिया रोग के परजीवी पनपते है। यह बीमारी प्रायः बचपन में ही प्रारम्भ हो जाती है और इसके दुष्परिणाम कई वर्षों बाद देखने को मिलते है। शुरूआत में फाइलेरिया बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखते है और एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे स्वस्थ्य

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