व्यक्ति को बिना कोई बाहरी लक्षण दिखे संक्रमित करता रहता है,

व्यक्ति को बिना कोई बाहरी लक्षण दिखे संक्रमित करता रहता है, एक सर्वे में फाइलेरिया प्रभावित जनपदों के 13 प्रतिशत स्कूल जाने वाले बच्चों में भी इस रोग का संक्रमण पाया गया है, जिससे इन बच्चों की शारीरिक कार्य क्षमता दिन प्रतिदिन कम होती जाती है और बाद में यही बच्चे अक्सर खेल कूद एवं अन्य गतिविधियों में पीछे रह जाते है। फाइलेरिया बीमारी से हाथ, पैर, स्तन योनी और अण्डकोष में सूजन पैदा हो जाती है। सूजन कारण फाइलेरिया प्रभावित अंग भारी हो जाता है और विकलांगता जैसी स्थिति बन जाती है और प्रभावित व्यक्ति का जीवन अत्यन्त कष्टदायक और कठिन हो जाता है। फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है इसका कोई भी सफल इलाज नहीं है। इस बीमारी से बचाव हेतु वर्ष में एक बार दवा खाना जरूरी है। यह दवा प्रत्येक वर्ष “सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वास्थ्य कर्मी द्वारा घर-घर जाकर मुफ्त में खिलाई जाती है, यह दवा खाना खाने के बाद और स्वास्थ्यकर्मी के सामने खानी है। यह दवा 2 वर्ष से कम बच्चों, गर्भवती माताआें और अत्यन्त गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को नहीं खानी है, जो लोग उच्च रक्त चाप, मधुमेह, अर्थराइटिस रोग की दवा का सेवन कर रहे है, वह भी दवा का सेवन अवश्य करें । सामान्य लोगों में, जिनके शरीर में फाइलेरिया रोग के कीटाणु नहीं है, दवा सेवन से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। दवा के सेवन से जब शरीर में फाइलेरिया कृमि मरते हैं तो बुखार, खुजली, उल्टी जैसे लक्षण सकते हैं, जो स्वतः 3-4 घण्टे में समाप्त हो जाते है। इस लक्षण के होने पर सामान्य में इलाज किया जा सकता है, घबराने की जरूरत नहीं है। हाइड्रोसील का इलाज संभव है इसके मुफ्त आपरेशन की सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला अस्पताल पर उपलब्ध है।
जिला मलेरिया अधिकारी अनुपमा मिश्रा द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तैयारी, फाइलेरिया से बचाव एवं उपचार का प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गयी।

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