पोषण मटका अभियान’’ के नाम पर प्रदेश के दो करोड़ परिवारों से मांग कर आंगनवाड़ी चलाने के अभियान की जांच कराये मुख्यमंत्री- दिग्विजय सिंह

पोषण मटका अभियान’’ के नाम पर प्रदेश के दो करोड़ परिवारों से मांग कर आंगनवाड़ी चलाने के अभियान की जांच कराये मुख्यमंत्री- दिग्विजय सिंह

दिग्विजय का सवाल- जब जनता से मांगकर ही आंगनवाड़ी चलाना है तो पोषण के लिए सरकार का बजट कौन खा गया…?

कुपोषण से नवजात बच्चे दम तोड़ रहे है और मामा जमीनी कार्यकर्ताओ से दबाव बनाकर उगाही करवा रही है

नर्मदापुरम- नर्मदापुरम जिले में पोषण मटका अभियान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहन, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, और पटवारी से घर घर अनाज एकत्रित कराने के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विरोध जताया । उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में लाखों की संख्या में बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। नौनिहाल प्रतिवर्ष असमय मौत का शिकार बन रहे हैं। प्रदेश में दस लाख से अधिक बच्चे कम वजन के होकर कुपोषित श्रेणी में सांसे ले रहे है। इन बच्चों को हजारो करोड़ रुपये के बजट से कुपोषण दूर करने की जगह आप प्रदेश में ’’पोषण मटका आहार’’ नाम से अभियान चलाकर मध्यवर्गीय परिवारों से ही लाखों क्विंटल अनाज की उगाही करवा रहे हैं, जो शर्मनाक है ।
कुपोषण दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का बजट गर्म नास्ता, खाना और पोष्टिक आहार वाले फल और दूध के लिए रखा जाता है। आपके नेतृृत्व में प्रदेश में सरकार चलते अब सत्रह वर्ष हो गए है लेकिन कुपोषण कम होने की बजाए बढ़ता जा रहा है ।

राज्य सरकार कुपोषण के लिए आवंटित बजट में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने की जगह प्रदेश की लगभग 23 हजार ग्राम पंचायतों और 52 हजार ग्रामों में सरकारी अमले को ग्रामीणों के घर भेजकर गेहूं, चना, मूंग, चावल, ज्वार, मक्का आदि अनाज मांग रहे हैं। इस कार्य में शाला शिक्षक, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, पटवारी, आशा कार्यकर्ता से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को लगाया गया है। इस संबंध में युवक कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता श्री शिवराज चंद्रोल द्वारा ज्ञापन भी दिया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि पूरे होशंगाबाद संभाग में शासकीय कर्मचारी बहुत शर्म का सामना करते हुए किसानों से अनाज मांगने जा रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर कह रही है कि आपके आदेश पर यह अनाज इकठ्ठा किया जा रहा है ये बेहद शर्मनाक है ।

प्रदेश में संचालित 1 लाख आंगनबाड़ी और उप आंगनबाड़ी केन्द्रो का सुचारु रुप से संचालन करने और कुपोषित बच्चों के लिये आवंटित बजट का एक-एक पैसा उन तक पहुँचाने की जगह प्रदेश में व्याप्त भारी कुपोषण से ध्यान भटकाने के लिये ’’पोषण मटका अभियान’’ चलाया जा रहा है जबकि प्रदेश की 10 हजार आंगनवाडियों में अभी स्वच्छ पेय जल, 30 हजार आंगनवाड़ियों में शौंचालय तक नहीं है। कई केन्द्रों में अभी तक वजन लेने की मशीनें नहीं हैं। 25 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्र किराये के कमरों में संचालित हैं। ग्रामों और कस्बों में 10 हजार आंगनवाड़ी कच्चे मकानों में चल रही है। आंगनवाड़ियों के लिये आये बजट से प्रशासनिक व्यवस्था ठीक करने की जगह आंगनवाड़ी गोद देने का अभियान भी वर्षों से कई रूपों में चल रहा है। लेकिन कुपोषण जस का तस है। अभी भी आंगनवाड़ियों में दर्ज 65 लाख बच्चों में से एक लाख बत्तीस हजार ठिगने हैं। इसी प्रकार छः लाख तीस हजार कम वजन के होकर कुपोषित हैं। दुबलापन के शिकार बच्चे 1 लाख 37 हजार है। औसत से कम उंचाई-लंबाई वाले बच्चे 2 लाख 64 हजार हैं। ये शर्मसार करने वाले आंकड़े राज्य विधानसभा में सरकार ने एक विधायक के जबाब में सदन के पटल पर रखे थे। इन बच्चों की माताओं की स्थिति भी बेहद दयनीय है। राज्य में शिशु मृत्यु दर का ग्राफ भी कम नहीं हो रहा है। प्रसव के दौरान हर माह डेढ़ हजार महिलाएँ दम तोड़ रही है।

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